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अकेला

Akela Rahi From Assam, India | Shayari, Status, Quotes | Nojoto...

न अकेला था न तन्हा था, हर एक पल ख्वाबों का मेला था।

मस्ती थी दिल में और हक़ीक़त ख्वाब हसती थी।

लेकिन हाँथो से जबसे ख्वाब लगे है फिसलने, लगता है खो गया हूँ अरण्य में और लगी साँझ हो ढलने।

जब संजोए थे सपने तो हाँ तनिक लोग भी थे प्यारे, थे शायद वो हमदम हमसफ़र साफ़री हमारे।

अब तो तफ़री भी उनकी भूल गया हूँ न ख्वाब है न हिं मेला बच गया हूँ हाँ नहीं शायद मै अकेला।

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

इस के बा’द आए जो अज़ाब आए

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे

दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए

हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चराग़ाँ हो

सामने फिर वो बे-नक़ाब आए

उम्र के हर वरक़ पे दिल की नज़र

तेरी मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब

आज तुम याद बे-हिसाब आए

न गई तेरे ग़म की सरदारी

दिल में यूँ रोज़ इंक़लाब आए

जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बाम

जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए

इस तरह अपनी ख़ामुशी गूँजी

गोया हर सम्त से जवाब आए

‘फ़ैज़’ थी राह सर-ब-सर मंज़िल

हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए

one of the most plausible poem of faiz

सामर्थ्य

क्यों जड़ चेतन सब शून्य है, खोने की चिंता न्युन्य है|

क्यों पथिक हुआ पथभ्रस्ट है, जनता जनसेवक से त्रस्त है|

है मानस मनुज से विभक्त क्यों, है प्रकृति पूत से आसक्त क्यों।

क्यों काटने को दौड़े है जनप्रहरी, है बोझिल मन ये आसक्त क्यों।

चेतन चिघाड़े है ये कलि प्रभाव, ना है ये देवपुत्रों में सामर्थ आभाव।

तू छोड़ चिंता करता है व्यर्थ क्यों, अग्रसर हो उस राह पे बन हस्ती

संजो अपना सामर्थ्य तू।

Can We Ever Stop Thinking? | Live Science

इच्छायें और संतुष्टि……

एक सिद्ध महात्मा से मिलने पहुंचे एक गरीब दम्पत्ति ने देखा कूड़े के ढेर पर सोने का चिराग पड़ा हुआ था ।

दंपत्ति ने महात्मा से पूछा तो महात्मा ने बताया कि ये तीन इच्छायें पूरी करने वाला बेकार चिराग है…

बहुत खतरनाक भी… जो इसको उठाकर ले जाता है वापस यहीं कूड़े में फेंक जाता है ।

गरीब दम्पत्ति ने जाते समय वो चिराग उठा लिया और घर पहुंचकर उससे तीन वरदान मांगने बैठ गये ।

दम्पत्ति गरीब थे और उन्होंने सबसे पहले दस लाख रूपये मांगकर चिराग को टेस्ट करने की सोची ।

जैसे ही उन्होंने रूपये मांगे तभी दरवाजे पर दस्तक हुई… जाकर खोला तो एक आदमी रुपयों से भरा बैग और एक लिफाफा थमा गया ।

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लिफाफे में एक पत्र था जिसमे लिखा हुआ था कि मेरी कार से टकराकर आपके पुत्र की मृत्यु हो गयी जिसके पश्चात्ताप स्वरूप ये दस लाख रूपये भेज रहा हूँ मुझे माफ़ करियेगा ।

अब दम्पत्ति को काटो तो खून नही.. पत्नी दहाड़े मार कर रोने लगी ।

तभी पति को ख्याल आया और उसने चिराग से दूसरी इच्छा बोल दी कि उसका बेटा वापस आ जाये ।

थोड़ी देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुयी और पूरे घर में अजीब सी आवाजें आने लगीं घर के बल्ब तेजी से जलने बुझने लगे उसका बेटा प्रेत बनकर वापस आ गया था ।

दम्पत्ति ने प्रेतरूप देखा तो बुरी तरह डर गये , और हड़बड़ी में चिराग से तीसरी इच्छा के रूप में प्रेत रूपी पुत्र की मुक्ति मांग कर दी ।

बेटे की मुक्ति के बाद रातों रात वो आश्रम पहुंचे चिराग को कूड़े के ढेर पर फेंक कर दुखी मन से वापस लौट आये ।

हम सभी अपनी जिंदगी में उस दम्पत्ति की तरह हैं… हमारी इच्छायें बेहिसाब हैं…

जब एक इच्छा पूरी होती है तो दूसरी सताने लगती है और जब दूसरी पूरी हो जाये तो तीसरी ।

इसलिए ईश्वर ने हमें जो भी दिया है उसमे संतुष्ट रहना चाहियें।

🌸🌸🌸🙏☺️

घण्टाधारी ऊँट

एक बार की बात हैं कि एक गांव में एक जुलाहा रहता था। वह बहुत गरीब था। उसकी शादी बचपन में ही हो गई ती। बीवी आने के बाद घर का खर्चा बढना था। यही चिन्ता उसे खाए जाती। फिर गांव में अकाल भी पडा। लोग कंगाल हो गए। जुलाहे की आय एकदम खत्म हो गई। उसके पास शहर जाने के सिवा और कोई चारा न रहा।
शहर में उसने कुछ महीने छोटे-मोटे काम किए। थोडा-सा पैसा अंटी में आ गया और गांव से खबर आने पर कि अकाल समाप्त हो गया हैं, वह गांव की ओर चल पडा। रास्ते में उसे एक जगह सडक किनारे एक ऊंटनी नजर आई। ऊटंनी बीमार नजर आ रही थी और वह गर्भवती थी। उसे ऊंटनी पर दया आ गई। वह उसे अपने साथ अपने घर ले आया।

घर में ऊंटनी को ठीक चारा व घास मिलने लगी तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई और समय आने पर उसने एक स्वस्थ ऊंट अच्चे को जन्म दिया। ऊंट बच्चा उसके लिए बहुत भाग्यशाली साबित हुआ। कुछ दिनों बाद ही एक कलाकार गांव के जीवन पर चित्र बनाने उसी गांव में आया। पेंटिंग के ब्रुश बनाने के लिए वह जुलाहे के घर आकर ऊंट के बच्चे की दुम के बाल ले जाता। लगभग दो सप्ताह गांव में रहने के बाद चित्र बनाकर कलाकार चला गया।

इधर ऊंटनी खूब दूध देने लगी तो जुलाहा उसे बेचने लगा। एक दिन वहा कलाकार गांव लौटा और जुलाहे को काफी सारे पैसे दे गया, क्योंकि कलाकार ने उन चित्रों से बहुत पुरस्कार जीते थे और उसके चित्र अच्छी कीमतों में बिके थे। जुलाहा उस ऊंट बच्चे को अपना भाग्य का सितारा मानने लगा। कलाकार से मिली राशी के कुछ पैसों से उसने ऊंट के गले के लिए सुंदर-सी घंटी खरीदी और पहना दी। इस प्रकार जुलाहे के दिन फिर गए। वह अपनी दुल्हन को भी एक दिन गौना करके ले आया।

ऊंटों के जीवन में आने से जुलाहे के जीवन में जो सुख आया, उससे जुलाहे के दिल में इच्छा हुई कि जुलाहे का धंधा छोड क्यों न वह ऊंटों का व्यापारी ही बन जाए। उसकी पत्नी भी उससे पूरी तरह सहमत हुई। अब तक वह भी गर्भवती हो गई थी और अपने सुख के लिए ऊंटनी व ऊंट बच्चे की आभारी थी।

27. THE CAMEL WITH A BELL ROUND HIS NECK

जुलाहे ने कुछ ऊंट खरीद लिए। उसका ऊंटों का व्यापार चल निकला।अब उस जुलाहे के पास ऊंटों की एक बडी टोली हर समय रहती। उन्हें चरने के लिए दिन को छोड दिया जाता। ऊंट बच्चा जो अब जवान हो चुका था उनके साथ घंटी बजाता जाटा।

एक दिन घंटीधारी की तरह ही के एक युवा ऊंट ने उससे कहा “भैया! तुम हमसे दूर-दूर क्यों रहते हो?”

घंटीधारी गर्व से बोला “वाह तुम एक साधारण ऊंट हो। मैं घंटीधारी मालिक का दुलारा हूं। मैं अपने से ओछे ऊंटों में शामिल होकर अपना मान नहीं खोना चाहता।”

उसी क्षेत्र में वन में एक शेर रहता था। शेर एक ऊंचे पत्थर पर चढकर ऊंटों को देखता रहता था। उसे एक ऊंट और ऊंटों से अलग-थलग रहता नजर आया। जब शेर किसी जानवर के झुंड पर आक्रमण करता हैं तो किसी अलग-थलग पडे को ही चुनता हैं। घंटीधारी की आवाज के कारण यह काम भी सरल हो गया था। बिना आंखों देखे वह घंटी की आवाज पर घात लगा सकता था।

दूसरे दिन जब ऊंटों का दल चरकर लौट रहा था तब घंटीधारी बाकी ऊंटों से बीस कदम पीछे चल रहा था। शेर तो घात लगाए बैठा ही था। घंटी की आवाज को निशाना बनाकर वह दौडा और उसे मारकर जंगल में खींच ले गया। ऐसे घंटीधारी के अहंकार ने उसके जीवन की घंटी बजा दी।

सीख :-
जो स्वयं को ही सबसे श्रेष्ठ समझता हैं उसका अहंकार शीघ्र ही उसे ले डूबता हैं।

क्रेडिट्स = अज्ञात

इश्क

history isn’t going to repeat itself my pen isn’t going to stop writing how I feel about the sickness and godness of this world

maknishant

तेरे इश्क ने क्या कमाल कर दिया

शबाबे हुस्न से मुझे कङाल कर दिया

फिर भि हर पल लुट रहा हूं मै लेकिन लोग कहते है तूने मुझे मालामाल कर दिया 😶

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“मैं ना होता तो क्या होता” पर एक प्रसंग ।

एक बार हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर तलवार लेकर सीता माँ को मारने के लिए दौड़ा, तब मुझे लगा कि इसकी तलवार छीन कर इसका सिर काट लेना चाहिये, किन्तु अगले ही क्षण मैंने देखा कि मंदोदरी ने रावण का हाथ पकड़ लिया, यह देखकर मैं गदगद हो गया ! यदि मैं कूद पड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मै न होता तो क्या होता ?

I have imagined this picture many times - The first step of relief ...

बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मुझे भी लगता कि यदि मै न होता तो सीताजी को कौन बचाता ? परन्तु आज आपने उन्हें बचाया ही नहीं बल्कि बचाने का काम रावण की पत्नी को ही सौंप दिया। तब मै समझ गया कि आप जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं, किसी का कोई महत्व नहीं है !

आगे चलकर जब त्रिजटा ने कहा कि लंका में बंदर आया हुआ है और वह लंका जलायेगा तो मै बड़ी चिंता मे पड़ गया कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नही है और त्रिजटा कह रही है तो मै क्या करुं ?

पर जब रावण के सैनिक तलवार लेकर मुझे मारने के लिये दौड़े तो मैंने अपने को बचाने की तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब विभीषण ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो मै समझ गया कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया !

आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नही जायेगा पर पूंछ मे कपड़ा लपेट कर घी डालकर आग लगाई जाये तो मैं गदगद् हो गया कि उस लंका वाली संत त्रिजटा की ही बात सच थी, वरना लंका को जलाने के लिए मै कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता और कहां आग ढूंढता, पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया, जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं तो मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !

इसलिये हमेशा याद रखें कि संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है, हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं, इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि…

    *मै न होता तो क्या होता*

प्राप्त हुनर का प्रयोग तभी होता है जब आप सही जगह पर हों|

एक दिन की बात है. एक ऊँट और उसका बच्चा बातें कर रहे थे. बातों-बातों में ऊँट के बच्चे ने उससे पूछा, “पिताजी! बहुत दिनों से कुछ बातें सोच रहा हूँ. क्या मैं आपसे उनके बारे में पूछ सकता हूँ?”

ऊँट बोला, “हाँ हाँ बेटा, ज़रूर पूछो बेटा. मुझसे बन पड़ेगा. तो मैं जवाब ज़रूर दूंगा.” Camel Talking To One Another Stock Photo - Download Image Now - iStock

“हम ऊँटों के पीठ पर कूबड़ क्यों होता है पिताजी?” ऊँट के बच्चे ने पूछा.

ऊँट बोला, “बेटा, हम रेगिस्तान में रहने वाले जीव हैं. हमारे पीठ में कूबड़ इसलिए है, ताकि हम इसमें पानी जमा करके रख सकें. इससे हम कई-कई दिनों तक बिना पानी के रह सकते हैं.”

“अच्छा और हमारे पैर इतने लंबे और पंजे गोलाकार क्यों हैं?” ऊँट के बच्चे ने दूसरा प्रश्न पूछा.

“जैसा मैं तुम्हें बता चुका हूँ कि हम रेगिस्तानी जीव हैं. यहाँ की भूमि रेतीली होती है और हमें इस रेतीली भूमि में चलना पड़ता है. लंबे पैर और गोलाकार पंजे के कारण हमें रेत में चलने में सहूलियत होती है.”

“अच्छा, मैं हमारे पीठ में कूबड़, लंबे पैर और गोलाकार पंजों का कारण तो समझ गया. लेकिन हमारी घनी पलकों का कारण मैं समझ नहीं पाता. इन घनी पलकों के कारण कई बार मुझे देखने में भी परेशानी होती है. ये इतनी घनी क्यों है?” ऊँट का बच्चा बोला.

“बेटे! ये पलकें हमारी आँखों की रक्षाकवच हैं. ये रेगिस्तान की धूल से हमारी आँखों की रक्षा करते हैं.”

“अब मैं समझ गया कि हमारी ऊँट में कूबड़ पानी जमा कर रखने, लंबे पैर और गोलाकार पंजे रेतीली भूमि पर आसानी से चलने और घनी पलकें धूल से आँखों की रक्षा करने के लिए है. ऐसे में हमें तो रेगिस्तान में होना चाहिए ना पिताजी, फिर हम लोग इस चिड़ियाघर में क्या कर रहे हैं?”

सीख – प्राप्त ज्ञान, हुनर और प्रतिभा तभी उपयोगी हैं, जब आप सही जगह पर हैं. अन्यथा सब व्यर्थ है. कई लोग प्रतिभावान होते हुए भी जीवन में सफ़ल नहीं हो पाते क्योंकि वे सही जगह/क्षेत्र पर अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल नहीं करते. अपनी प्रतिभा व्यर्थ जाने मत दें.

पंचमुखी हनुमान जी की पौराणिक कथा

जब राम और रावण की सेना के मध्य भयंकर युद्ध चल रहा था और रावण अपने पराजय के समीप था तब इस समस्या से उबरने के लिए उसने अपने मायावी भाई अहिरावन को याद किया जो मां भवानी का परम भक्त होने के साथ साथ तंत्र मंत्र का का बड़ा ज्ञाता था। उसने अपने माया के दम पर भगवान राम की सारी सेना को निद्रा में डाल दिया तथा राम एव लक्ष्मण का अपरहण कर उनकी देने उन्हें पाताल लोक ले गया।Hanuman Jayanti 2020, Date, Puja Timing, Muhurat & Birth Place Of ...

कुछ घंटे बाद जब माया का प्रभाव कम हुआ तब विभिषण ने यह पहचान लिया कि यह कार्य अहिरावन का है और उसने हनुमानजी को श्री राम और लक्ष्मण सहायता करने के लिए पाताल लोक जाने को कहा। पाताल लोक के द्वार पर उन्हें उनका पुत्र मकरध्वज मिला और युद्ध में उसे हराने के बाद बंधक श्री राम और लक्ष्मण से मिले।

वहां पांच दीपक उन्हें पांच जगह पर पांच दिशाओं में मिले जिसे अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे। इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर अहिरावन का वध हो जाएगा इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा।

उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया।

चार मोमबत्तियाँ

रात का समय था. चारों ओर घुप्प अंधेरा छाया हुआ था. केवल एक ही कमरा प्रकाशित था. वहाँ चार मोमबत्तियाँ जल रही थी.Meet the Monster that's Killing you Indoor Air Quality

चारों मोमबत्तियाँ एकांत देख आपस में बातें करने लगी. पहली मोमबत्ती बोली, “मैं शांति हूँ. जब मैं इस दुनिया को देखती हूँ, तो बहुत दु:खी होती हूँ. चारों ओर आपा-धापी, लूट-खसोट और हिंसा का बोलबाला है. ऐसे में यहाँ रहना बहुत मुश्किल है. मैं अब यहाँ और नहीं रह सकती.” इतना कहकर मोमबत्ती बुझ गई.

दूसरी मोमबत्ती भी अपने मन की बात कहने लगी, “मैं विश्वास हूँ. मुझे लगता है कि झूठ, धोखा, फरेब, बेईमानी मेरा वजूद ख़त्म करते जा रहे हैं. ये जगह अब मेरे लायक नहीं रही. मैं भी जा रही हूँ.” इतना कहकर दूसरी मोमबत्ती भी बुझ गई.

तीसरी मोमबत्ती भी दु:खी थी. वह बोली, “मैं प्रेम हूँ. मैं हर किसी के लिए हर पल जल सकती हूँ. लेकिन अब किसी के पास मेरे लिए वक़्त नहीं बचा. स्वार्थ और नफरत का भाव मेरा स्थान लेता जा रहा है. लोगों के मन में अपनों के प्रति भी प्रेम-भावना नहीं बची. अब ये सहना मेरे बस की बात नहीं. मेरे लिए जाना ही ठीक होगा.” कहकर तीसरी मोमबत्ती भी बुझ गई.

तीसरी बत्ती बुझी ही थी कि कमरे में एक बालक ने प्रवेश किया. मोमबत्तियों को बुझा हुआ देख उसे बहुत दुःख हुआ. उसकी आँखों से आँसू बहने लगे. दु:खी मन से वो बोला, “इस तरह बीच में ही मेरे जीवन में अंधेरा कर कैसे जा सकती हो तुम. तुम्हें तो अंत तक पूरा जलना था. लेकिन तुमने मेरा साथ छोड़ दिया. अब मैं क्या करूंगा?”

बालक की बात सुन चौथी मोमबत्ती बोली, “घबराओ नहीं बालक. मैं आशा हूँ और मैं तुम्हारे साथ हूँ. जब तक मैं जल रही हूँ, तुम मेरी लौ से दूसरी मोमबत्तियों को जला सकते हो.”

चौथी मोमबत्ती की बात सुनकर बालक का ढाढस बंध गया. उसने आशा के साथ शांति, विश्वास और प्रेम को पुनः प्रकाशित कर लिया.

स्वयं की क्षमता पहचानिए

पंचतंत्र की कहानी: आलसी ब्राह्मण ...

एक गाँव में एक आलसी आदमी रहता था. वह कुछ काम-धाम नहीं करता था. बस दिन भर निठल्ला बैठकर सोचता रहता था कि किसी तरह कुछ खाने को मिल जाये.

एक दिन वह यूं ही घूमते-घूमते आम के एक बाग़ में पहुँच गया. वहाँ रसीले आमों से लदे कई पेड़ थे. रसीले आम देख उसके मुँह में पानी आ गया और आम तोड़ने वह एक पेड़ पर चढ़ गया. लेकिन जैसे ही वह पेड़ पर चढ़ा, बाग़ का मालिक वहाँ आ पहुँचा.

बाग़ के मालिक को देख आलसी आदमी डर गया और जैसे-तैसे पेड़ से उतरकर वहाँ से भाग खड़ा हुआ. भागते-भागते वह गाँव में बाहर स्थित जंगल में जा पहुँचा. वह बुरी तरह से थक गया था. इसलिए एक पेड़ के नीचे बैठकर सुस्ताने लगा.

तभी उसकी नज़र एक लोमड़ी पर पड़ी. उस लोमड़ी की एक टांग टूटी हुई थी और वह लंगड़ाकर चल रही थी. लोमड़ी को देख आलसी आदमी सोचने लगा कि ऐसी हालत में भी इस जंगली जानवरों से भरे जंगल में ये लोमड़ी बच कैसे गई? इसका अब तक शिकार कैसे नहीं हुआ?

जिज्ञासा में वह एक पेड़ पर चढ़ गया और वहाँ बैठकर देखने लगा कि अब इस लोमड़ी के साथ आगे क्या होगा?

कुछ ही पल बीते थे कि पूरा जंगल शेर की भयंकर दहाड़ से गूंज उठा. जिसे सुनकर सारे जानवर डरकर भागने लगे. लेकिन लोमड़ी अपनी टूटी टांग के साथ भाग नहीं सकती थी. वह वहीं खड़ी रही.

शेर लोमड़ी के पास आने लगा. आलसी आदमी ने सोचा कि अब शेर लोमड़ी को मारकर खा जायेगा. लेकिन आगे जो हुआ, वह कुछ अजीब था. शेर लोमड़ी के पास पहुँचकर खड़ा हो गया. उसके मुँह में मांस का एक टुकड़ा था, जिसे उसने लोमड़ी के सामने गिरा दिया. लोमड़ी इत्मिनान से मांस के उस टुकड़े को खाने लगी. थोड़ी देर बाद शेर वहाँ से चला गया.

यह घटना देख आलसी आदमी सोचने लगा कि भगवान सच में सर्वेसर्वा है. उसने धरती के समस्त प्राणियों के लिए, चाहे वह जानवर हो या इंसान, खाने-पीने का प्रबंध कर रखा है. वह अपने घर लौट आया.

घर आकर वह 2-3 दिन तक बिस्तर पर लेटकर प्रतीक्षा करने लगा कि जैसे भगवान ने शेर के द्वारा लोमड़ी के लिए भोजन भिजवाया था. वैसे ही उसके लिए भी कोई न कोई खाने-पीने का सामान ले आएगा.

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. भूख से उसकी हालात ख़राब होने लगी. आख़िरकार उसे घर से बाहर निकलना ही पड़ा. घर के बाहर उसे एक पेड़ के नीचे बैठे हुए बाबा दिखाए पड़े. वह उनके पास गया और जंगल का सारा वृतांत सुनाते हुए वह बोला, “बाबा जी! भगवान मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? उनके पास जानवरों के लिए भोजन का प्रबंध है. लेकिन इंसानों के लिए नहीं.”

बाबा जी ने उत्तर दिया, “बेटा! ऐसी बात नहीं है. भगवान के पास सारे प्रबंध है. दूसरों की तरह तुम्हारे लिए भी. लेकिन बात यह है कि वे तुम्हें लोमड़ी नहीं शेर बनाना चाहते हैं.”

 

 

कलम तोड़ दी

अभी सभी घर में बंद है में भी हूँ भाई सुताई का डर जो है, लेकिंग सच बोलू तो उस का भी  है| मैं नाम नहीं लूंगा आप  खुद समझ जाओ| नहीं समझ पा  रहे हो तो भाई तुम्हारा भगवन ही मालिक है।  कल मेरे एक उलझुए मित्र  का फ़ोन आया। उनका कहना था की अब वो इन हालातो में एक दम समझ गए  है की ये मानव जाती का कर्मा है।  लेकिन मुझे ये नहीं समझ आया वो इतने सुलझ कैसे गए।  जब वो सुलझ गए  तो उन्हें ये समझ भी आ गया होगा की वो इतने उलझन में क्यों  रहते है।  यार एक विचारक जो ठहरे।

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एक किस्सा बताता हूँ , क्यों बताऊ ये हमारे बिच की बात है। अगर बता दिआ तो जो भी रही सही धाक  है उनपर मेरी वो भी चली जाए गई न तो वो मुफ्त की चाय मिलेगी न ही समोसे क्यों की इस मामले में मैं  उन्हें कंफ्यूज नहीं देता। एक बात पुछु  हम तो  घर  बंद है लेकिन  फिर भी स्वतंत्र है लेकिन उनका क्या जो हमेसा से ही बंद है।  हमारे अंदर की इंसानियत याराना सादगी।  कहने को हम  सब भारत वासी है लेकिन अब ये कलाम बासी हो गया है।  अब नए की जरुरत है सोंच भी और इंसानो की भी लेकिन ये टिक्टोक  कुछ  और सोंचने दे तब न अभी  दिमाग में सिर्फ स्क्रिप्ट और  लोकेशन चलता रहता है।  हाँ मै भी अब कंफ्यूज हूँ टिक टॉक और खुद में पता नहीं कब ये बैन होगा  और मैं फिर से वही पुरानी सकल अख्त्यार कर पाउंगा।  यार इसने तो मेरी कलम तोड़ दी।

महिला दिवस

mahila diwas के लिए इमेज नतीजे

यूँ तो भारत में राष्ट्रीय महिला दिवस बारह फरवरी को मनाया जाता है| मगर अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की धूम ज्यादा है|

दरअसल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक मज़दूर आंदोलन से उपजा है. इसका बीजारोपण साल 1908 में हुआ था जब 15 हज़ार औरतों ने न्यूयॉर्क शहर में मार्च निकालकर नौकरी में कम घंटों की मांग की थी.

इसके अलावा उनकी मांग थी कि उन्हें बेहतर वेतन दिया जाए और मतदान करने का अधिकार भी दिया जाए. एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमरीका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया.

जिसके बाद महिलाओ को शसक्त बनाने की दिशा में और भी बहुत से कार्य हुए.

लेकिन भारत में सरोजिनी नायडू के जन्मदिन को हर साल 13 फरवरी को भारत के राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मानते है  उन्हें भारत की पहली महिला राज्यपाल बनने का गौरव प्राप्त है वो एक बहुत ही अच्छी लेखिका थी

उनकी  कुछ महवत्पूर्ण रचनाए है

1905 में प्रकाशित गोल्डन थ्रेशोल्ड उनकी कविताओं का पहला संग्रह
: द बर्ड ऑफ़ टाइम: लाइक्स ऑफ़ डेथ, डेथ एंड द स्प्रिंग
• फेस्ट ऑफ़ यूथ
• द मैजिक ट्री
• द विजार्ड मास्क
: मुहम्मद जिन्ना: एन एम्बेसेडर यूनिटी
• द सेप्ट्रेड फ्लूट: सोंग्स ऑफ इंडिया, इलाहाबाद: किताबीस्तान
• द इंडियन वीवर्स

उनकी सबसे पहली रचना जिसे हम सबमे से बहोतो ने स्कूल में पढ़ी होंगी द बैंगल सेलर

कुल मिलाकर वो एक ऐसी महिला थीं जिन्हे आदर्श मन जाता है|

आप सभी को महिला दिवस की शुभकामनाए|

अप्सरा का श्राप

वैसे पढ़ने को तो मैं बहुत कुछ पढ़ता हूँ। कभी सौख से तो कभी कुछ अच्छा सीखने के लिए| मगर कभी कभी कुछ ऐसा पढ़ लेता हूँ,  जिसे पढ़ने के बाद मन कहता है और ये कभी ख़तम ही न हो बस मै ऐसे ही पढ़ते रहूं। ये किताब भी मुझे कुछ ऐसी ही लगी. इसे मैंने लिया  तो था, फुटपाथ से लेकिन इसके शब्द ऐसे है मानो मैं खुद वहां मौजूद हूँ जहाँ ये सब घटित हो रहा है|

जो किताब मैंने ली थी उसमे तो लेखक के बारे में कुछ  नहीं  था लेकिन मैंने यशपाल जी के बारे में बहुत सुना था और पढ़ा था अखबारों में और अलग अलग जगहों पर उनकी ये कृति अद्भुत ही नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व का परिचय भी देती है के वो एक अद्भुत इंसान रहे होंगे ये मेरा सोचना है|

वैसे उनकी सभी लिखी हुई चीजों में से मुझे फूलों का कुरता वो पहली कहानी है जो मैंने पढ़ी और उसकी जैसी कोई चीज किसी अलग लेखक से नहीं मिली।  ❤❤yashpal-hindi-writer-s_650_120314023502

 

इश्क़ = सौदा-ए -नाकाफ़ी

इश्क़ है हुजूर ये सौदा ए नाकाफी है,
है बहार इसमें तो ग़म भी काफी है,
तस्दीक से करना ओ मजनूं
मदहोश ख्याली इसमें फ़ना हो जाते है

नैना निराले

होरी तेरे नैना निराले,

नैनन पे जरा कारी काजल लगा ले।

होठो पे जरा लाली लगाले,

गोरी तेरे नैना निराले।

तेरे नैनो के सागर में नाचे मेरे प्रेम की नैया
हौले हौले यो ही चलती रहे पवन पुरवाइआ
होंठो से पिला जरा प्रेम रस प्याले
होरी तेरे नैना निराले।

तेरी आहिस्ता आवाज हौले आघात करे
तेरी वो प्यारी सी हसी हर वक्त मुझे हमसाज करे
तेरी वो यादें जिसे हर वक्त हम गले से लागले
होरी तेरे नैना निराले।

तुझे देख मन में छाए बादल काले
जो देखे एक बार तुझे मन में बसाले।
तेरे वो धारदार नैना उसे मार ही डाले
होरी गोरी तेरे नैना निराले।

taruf itna dekar

तमन्ना छोड़ देते हैं… इरादा छोड़ देते हैं,
चलो एक दूसरे को फिर से आधा छोड़ देते हैं।

उधर आँखों में मंज़र आज भी वैसे का वैसा है,
इधर हम भी निगाहों को तरसता छोड़ देते हैं।

हमीं ने अपनी आँखों से समन्दर तक निचोड़े हैं,
हमीं अब आजकल दरिया को प्यासा छोड़ देते हैं।

हमारा क़त्ल होता है, मोहब्बत की कहानी में,
या यूँ कह लो कि हम क़ातिल को ज़िंदा छोड़ देते हैं।

हमीं शायर हैं, हम ही तो ग़ज़ल के शाहजादे हैं,
तआरुफ़ इतना देकर बाक़ी मिसरा छोड़ देते हैं।

I don’t know who writes this but its beautiful and interesting

उनसे पूछे

पूछे कोई शाम से या श्याम से पूछे

या मेरे प्रिय उस कमल नयन  राम से पूछे

हूं कौन मैं कोई उनसे मेरा नाम तो पूछे ।

पूछ रहा तो यह भी पूछे कि मनुज का सार क्या है

पूछ रहा तो यह भी पूछे कि मन का अंधकार क्या है।

है क्या यह तमस संसार क्या है

पूछना है तो यह भी पूछे कि क्या है अरमान सितारों के

सूरज के अंबर के तुम्हारे।

रश्मिरथी

मुसीबत को जो नही झेल सकता,

निराशा से जो नहीं खेल सकता।

पुरुष क्या श्रृंखला को तोड़ करके,

चले आगे नहीं जो जोर करके?

दिनकर जी के ये शब्द न जाने कैसे किसे बदल दे और न जाने कैसे महसूस करने वालो के हृदय में अग्नि भर देते हैं।

🙏 उन्हें जो हमेशा कुछ अच्छा कर आगे बढ़ने की ऊर्जा देते है।

उठा के कलम

उठा के कलम मैं अब अपना इंतकाम लिखूंगा।

खो दिया जिन लम्हों को अब उन लम्हों को एक पैगाम लिखूंगा।

समय के पन्नों पर अब मैं अपना कलाम लिखूंगा।

छिपे हुए इस जहान में हर एक रूह को मैं अपना सलाम लिखूंगा।

न अंधेरों की ताकत मुझे रोक पाएगी ना उजालों का खौफ मुझे सताएगा

जब तलक रहेगी कलम हाथ में न कोई मुझे रोक पाएगा।

गिरूंगा और उठूंगा लेकिन हर एक कड़वा कलाम लिखूंगा।